यारों के यार बोले तो दीवाना हो गया
यारों के यार बोले तो दीवाना हो गया,
जिस डाल पे बैठा था उसका टूटना हो गया।
बाज आती नहीं ये जिंदगी भी उल्फ़तों से,
सिद्दतो की बयानी पल में समझना हो गया।
मुसाफिर हूँ यारों ए नाजुक दिल क्या जाने,
जाने कैसे अग्निपथ भी साधना हो गया।
कानों को सुनाई देती नहीं जहां की शोर,
इस कदर हमीं का हमीं पे यूँ जमना हो गया।
दर महीने गुज़र गये ताबूत में कैद सा रहे,
खाऊँ कसम तेरे इश्क़ में जागना हो गया।
दाम उन्माद की वस्ल ही जाने यूँ शायद,
सर उठायी तो अंबर का मुस्कुराना हो गया।
'राज' दुनिया माने ग़र जद तेरी उसूल तेरा,
राह को यकीं हो गया कि तू दीवाना हो गया।
©रामा श्रीनिवास 'राज'
बंगलुरु, कर्नाटक।
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