.... सफे हैं और भी।
भूल जाते फ़लसफ़े हैं और भी। राह में यूँ हासिये हैं और भी।१ आजकल यूँ गीत गाये जा रहे, सीखने से रह गये हैं और भी।२ . यूँ गमों के सिलसिले से ना ड़रो, हौसलों से जी लिये हैं और भी।३ कोशिशों में वक्त जाये भी कहाँ, साथ शायर के लिखे हैं और भी।४. दिल दिया अपना समझ के तो क्या, ए़ इश्क़ के काफ़िले हैं और भी।५ फूल इतराये बहुत कम बाग में, बिखरने को फ़िर खिले हैं और भी।६ ए़ अश्क़ को 'राज' बहने भी न दो। ठोकरों बावत बचे हैं और भी।७ रामा श्रीनिवास 'राज' बंगलुरु, कर्नाटक ~~||◆||~~🍂🌸🍂 ~~~||◆||~